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एनएसई का 22,569 करोड़ रुपये का आईपीओ शुरू, पहले दिन अब तक 12 प्रतिशत अभिदान

Authored By HDFC SKY | Updated at: Sep 17, 2026 01:00 PM IST

एनएसई का 22,569 करोड़ रुपये का आईपीओ शुरू, पहले दिन अब तक 12 प्रतिशत अभिदान

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मुंबई, 17 सितंबर: देश के सबसे बड़े शेयर बाजार मंच NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित IPO की शुरुआत आज यानी  17 सितंबर 2026 को हो गई है। ₹22,569 करोड़ का यह इश्यू निवेशकों के बीच काफी चर्चा में है। सार्वजनिक सदस्यता शुरू होने के करीब आधे घंटे में ही इश्यू को 12 प्रतिशत तक अभिदान मिल गया है। शुरुआती दौर में गैर–संस्थागत और खुदरा निवेशकों की भागीदारी प्रमुख रही।

जानकारी दें कि, NSE का यह IPO देश के बड़े सार्वजनिक निर्गमों में शामिल है। प्रस्तावित मूल्यांकन के आधार पर कंपनी दुनिया के बड़े सूचीबद्ध एक्सचेंजों में भी अपनी जगह बना सकती है। हालांकि, केवल कंपनी का आकार और बाजार में उसकी मजबूत स्थिति देखकर निवेश का फैसला करना उचित नहीं होगा। कीमत, कमाई, कारोबार की संरचना और नियामकीय जोखिम को समझना भी जरूरी है।

इश्यू की तारीख

NSE IPO में निवेश के लिए बोली आज यानी 17 सितंबर से शुरू हुई है और 21 सितंबर को बंद होगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, शेयरों के 24 सितंबर को बाजार में सूचीबद्ध होने की उम्मीद है।

यह पूरा इश्यू ऑफर फॉर सेल (OFS) है। यानी NSE नए शेयर जारी करके पैसा नहीं जुटा रहा है, बल्कि मौजूदा शेयरधारक ही फिलहाल अपने शेयर बेच रहे हैं। अभी कुल 12.64 करोड़ शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं। इसलिए IPO से मिलने वाली रकम कंपनी के कारोबार में सीधे नहीं जाएगी, बल्कि शेयर बेचने वाले मौजूदा निवेशकों को मिलेगी

कीमत और लॉट

NSE IPO का मूल्य दायरा ₹1,700 से ₹1,785 प्रति शेयर तय किया गया है। एक लॉट में 8 शेयर हैं। ऊपरी मूल्य पर एक लॉट के लिए निवेशक को ₹14,280 खर्च करने होंगे।वहीं खुदरा निवेशकों के लिए इश्यू का 35 प्रतिशत हिस्सा रखा गया है। योग्य संस्थागत खरीदारों यानी QIB के लिए 50 प्रतिशत हिस्सा आरक्षित है। शेष हिस्सा गैर–संस्थागत निवेशकों के लिए उपलब्ध है।

जानकारी NSE IPO
इश्यू का आकार ₹22,569 करोड़
IPO खुलने की तारीख 17 सितंबर 2026
IPO बंद होने की तारीख 21 सितंबर 2026
मूल्य दायरा ₹1,700–₹1,785
लॉट साइज 8 शेयर
एक लॉट का अधिकतम मूल्य ₹14,280
रिटेल हिस्सा 35%
QIB हिस्सा 50%
इश्यू का प्रकार ऑफर फॉर सेल
संभावित लिस्टिंग 24 सितंबर 2026

एंकर निवेशकों का भरोसा

जानकारी दें कि आज IPO खुलने से पहले NSE की एंकर बुक में 150 से अधिक निवेशकों ने हिस्सा लिया। इस बाबत उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एंकर निवेशकों के लिए रखे गए शेयरों में करीब 43 प्रतिशत हिस्सेदारी विदेशी फंडों को मिली।

इस श्रेणी में अमेरिका, यूरोप और एशिया के सॉवरेन वेल्थ फंड, वैश्विक संपत्ति प्रबंधक और लॉन्ग–टर्म निवेश करने वाले फंड शामिल थे। NSE ने एंकर निवेशकों को ₹1,785 प्रति शेयर के भाव पर करीब 3.78 करोड़ शेयर आवंटित किए। इससे एंकर निवेशकों से लगभग ₹6,746.18 करोड़ जुटाए गए।

कमाई का आधार

बताते चलें कि, NSE का कारोबार केवल शेयरों की खरीद–बिक्री तक सीमित नहीं है। बल्कि कंपनी ट्रेडिंग के साथ क्लियरिंग, लिस्टिंग, बाजार से जुड़े आंकड़े और इंडेक्स लाइसेंसिंग जैसी सेवाएं भी देती है।इसके प्लेटफॉर्म पर शेयरों के अलावा फ्यूचर्स और ऑप्शंस, म्यूचुअल फंड, कमोडिटी डेरिवेटिव्स, करेंसी डेरिवेटिव्स, डेट और ब्याज दर से जुड़े उत्पादों में कारोबार होता है। इस विविध कारोबार से NSE को बाजार गतिविधियों से अलग–अलग तरीकों से आय प्राप्त होती है।

बाजार में मजबूत पकड़

बताते चलें कि, NSE की सबसे बड़ी कारोबारी ताकत भारतीय शेयर बाजार में उसकी बड़ी हिस्सेदारी है। बीते जून 2026 तक NSE के पास करीब 13.24 करोड़ पंजीकृत विशिष्ट निवेशक थे। इसके साथ 1,328 ट्रेडिंग सदस्य और 3,005 सूचीबद्ध कंपनियां जुड़ी थीं।

इन कंपनियों का कुल बाजार मूल्य करीब ₹474.1 लाख करोड़ बताया गया है। FY01 से FY26 के दौरान नकद बाजार कारोबार और इक्विटी डेरिवेटिव्स कारोबार के मामले में NSE देश के प्रमुख एक्सचेंजों में रहा है।

हिस्सेदारी का दबदबा

इसी तरह बीते जून 2026 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, नकद बाजार में NSE की हिस्सेदारी करीब 93 प्रतिशत थी। इक्विटी फ्यूचर्स में इसकी हिस्सेदारी लगभग 99.7 प्रतिशत और प्रीमियम कारोबार के आधार पर इक्विटी ऑप्शंस में करीब 68.5 प्रतिशत थी।

यह मजबूत स्थिति NSE को कारोबार में बड़ा लाभ देती है। हालांकि, इतनी बड़ी हिस्सेदारी का दूसरा पहलू यह है कि कंपनी की कमाई बाजार के कारोबार और नियामकीय बदलावों से काफी प्रभावित भी हो सकती है।

राजस्व में दिखा बदलाव

FY26 में NSE ने परिचालन से ₹16,601 करोड़ का राजस्व दर्ज किया। यह FY25 के ₹17,141 करोड़ से करीब 3.1 प्रतिशत कम है। इसके बावजूद कंपनी के परिचालन मार्जिन मजबूत बने रहे।

ऐसे में अब, निवेशकों के लिए यहां एक अहम बात यह है कि केवल कुल राजस्व देखकर कंपनी की वित्तीय स्थिति नहीं समझी जा सकती। यह देखना जरूरी है कि कमाई किन कारोबारों से आ रही है और उन कारोबारों में आगे कितना बदलाव संभव है।

सबसे बड़ा जोखिम

गौरतलब है कि, NSE के कारोबार से जुड़ा प्रमुख जोखिम लेनदेन शुल्क पर इसकी निर्भरता है। FY26 में कंपनी के परिचालन राजस्व का करीब 78.7 प्रतिशत हिस्सा लेनदेन शुल्क से आया है।इसमें ऑप्शंस कारोबार की भूमिका भी बहुत बड़ी है। FY26 में ऑप्शंस से जुड़ी गतिविधियों ने परिचालन राजस्व में करीब 60.2 प्रतिशत योगदान दिया। इसलिए डेरिवेटिव्स कारोबार से जुड़े नियमों में बदलाव NSE की आय पर सीधा असर डाल सकते हैं।

समझें नियामकीय जोखिम

शेयर बाजार और डेरिवेटिव्स कारोबार पर नियम समय–समय पर बदलते रहते हैं। ऐसे में, नियामक अगर कारोबार की लागत, शुल्क, मार्जिन, ट्रेडिंग या डेरिवेटिव्स से जुड़े नियमों में बदलाव करता है, तो इसका असर NSE के कारोबार पर पड़ सकता है।

इसलिए IPO का मूल्यांकन करते समय कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति के साथ–साथ नियामकीय जोखिम को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

वैल्यूएशन पर नजर

जानकारी दें कि, ₹1,785 के ऊपरी मूल्य दायरे पर NSE का मूल्यांकन FY26 की कमाई के करीब 42.9 गुना बताया गया है। यह आंकड़ा दिखाता है कि IPO में निवेश करने वाले निवेशक कंपनी की मौजूदा कमाई के मुकाबले काफी ऊंचा मूल्य चुका रहे होंगे।

कुछ ब्रोकरेज संस्थानों ने IPO को लेकर सकारात्मक राय दी है और कंपनी की मजबूत बाजार हिस्सेदारी, कारोबार की स्थिति और कमाई की क्षमता को प्रमुख आधार माना है। वहीं, ऊंचा मूल्यांकन और नियामकीय जोखिम ऐसे बिंदु हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

निवेश से पहले जांच

NSE जैसा बड़ा और स्थापित कारोबार होने के बावजूद IPO में जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता। निवेशक को यह देखना चाहिए कि मौजूदा मूल्य पर कंपनी की कमाई और भविष्य की विकास क्षमता किस हद तक उचित बैठती है।

इसके साथ ही यह समझना जरूरी है कि पूरा इश्यू OFS है। यानी IPO से जुटाई गई रकम कंपनी के विस्तार या नए प्रोजेक्ट के लिए सीधे उपलब्ध नहीं होगी। निवेशक को कंपनी के राजस्व स्रोत, ऑप्शंस पर निर्भरता, नियामकीय बदलाव और मूल्यांकन को साथ में देखना चाहिए।

HDFC Sky से जानकारी

IPO में निवेश करने वाले निवेशकों के लिए सही जानकारी और कंपनी के आंकड़ों को समझना बेहद जरूरी है। HDFC Sky जैसे निवेश मंच पर निवेशक बाजार, शेयरों और निवेश से जुड़े शोध एवं जानकारी के आधार पर अपनी तैयारी कर सकते हैं। किसी भी IPO में आवेदन करने से पहले कंपनी के वित्तीय आंकड़े, मूल्यांकन, जोखिम और अपने निवेश लक्ष्य को समझना जरूरी है। किसी भी मंच या IPO से निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं होती।

क्या समझें निवेशक?

NSE IPO में एक तरफ देश के सबसे बड़े एक्सचेंज की मजबूत बाजार स्थिति, बड़ा निवेशक आधार और विविध कारोबार है। दूसरी तरफ इसका मूल्यांकन ऊंचा है और कमाई का बड़ा हिस्सा लेनदेन शुल्क तथा डेरिवेटिव्स कारोबार से आता है।

यही वजह है कि NSE IPO को केवल बड़े नाम के आधार पर देखने के बजाय उसके कारोबार, कमाई की गुणवत्ता, मूल्यांकन और नियामकीय जोखिम को समझना जरूरी है। IPO में आवेदन करने का फैसला निवेशक की जोखिम क्षमता, निवेश अवधि और वित्तीय लक्ष्य के अनुरूप होना चाहिए।

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