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5.25% से आगे जाएगा रेपो रेट? महंगाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के बीच RBI की बड़ी बैठक शुरू

Authored By HDFC SKY | Published at: Oct 5, 2026 03:38 PM IST

5.25% से आगे जाएगा रेपो रेट? महंगाई और कच्चे तेल की बढ़ती कीमत के बीच RBI की बड़ी बैठक शुरू

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मुंबई : भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC की तीन दिन की बैठक आज यानी 5 अक्टूबर सोमवार से  शुरू हो गई है। इस बैठक का फैसला आगामी 7 अक्टूबर को आएगा। इस बार सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या RBI, अपने  रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट यानी 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी करेगा। 

अभी यह रेपो रेट 5.25 प्रतिशत है। अगर इसमें 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो यह बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगा। ऐसा हुआ तो बीते फरवरी 2023 के बाद यह पहली बढ़ोतरी होगी। इसलिए इस बैठक पर आम लोगों से लेकर बैंक और शेयर बाजार तक सभी की नजर बनी हुई है। 

महंगाई ने बढ़ाई चिंता 

गौरतलब है कि, RBI के सामने इस समय सबसे बड़ी चिंता महंगाई को लेकर है। खाद्य और ऊर्जा की कीमतों में दबाव के साथ कच्चे तेल के दाम भी फिलहाल ऊंचे बने हुए हैं। जानकारी दें कि, भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा दूसरे देशों से खरीदता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का असर घरेलू अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। 

पता हो कि, तेल की कीमत बढ़ने से केवल पेट्रोल और डीजल महंगे होने का खतरा नहीं रहता। माल ढुलाई, उत्पादन और कई दूसरी सेवाओं की लागत भी बढ़ सकती है। इसका असर धीरे–धीरे दूसरी वस्तुओं की कीमतों पर दिखाई दे सकता है। 

कच्चे तेल का बढ़ता दबाव 

आज RBI की बैठक शुरू होने के समय Brent कच्चा तेल करीब 101.26 डॉलर प्रति बैरल और क्रूड ऑयल करीब 89.98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था। 

RBI के लिए यह स्थिति इसलिए अहम है क्योंकि लंबे समय तक महंगा तेल रहने से महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं अब RBI  इस बात को भी देखेगा कि तेल की मौजूदा कीमतें आगे कितने समय तक बनी रह सकती हैं। यानी फैसला केवल आज की महंगाई को देखकर नहीं होगा। आने वाले महीनों में कीमतों का रुख कैसा रह सकता है, यह भी काफी महत्वपूर्ण होगा। 

दर बढ़ने की चर्चा क्यों? 

दरअसल, वित्तीय बाजार में इस समय 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की संभावना को काफी मजबूत माना जा रहा है। अगर ऐसा होता है तो रेपो रेट 5.25 प्रतिशत से बढ़कर 5.50 प्रतिशत हो जाएगा। 

जानकारी दें कि, रेपो रेट वह ब्याज दर है जिस पर RBI बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा देता है। इसमें बदलाव होने पर बैंकों की पैसे की लागत प्रभावित होती है। इसका असर आगे चलकर कर्ज की ब्याज दरों पर भी पड़ सकता है। 

हालांकि, अभी इसे पक्का फैसला नहीं माना जा सकता। अंतिम निर्णय MPC के सदस्यों के आकलन और आर्थिक आंकड़ों पर निर्भर करेगा। 

पिछले साल दरों में हुई थी कटौती 

गौरतलब है कि, RBI ने साल 2025 में कुल 125 बेसिस पॉइंट यानी 1.25 प्रतिशत की दर कटौती की थी। इसके बाद पिछली चार बैठकों में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखा गया। 

वहीं बीते अगस्त 2026 की बैठक में भी दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था। उस समय MPC ने रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर कायम रखते हुए अपना रुख ‘न्यूट्रल‘ रखा था। 

उस वक्त मानसून, अल नीनो, दुनिया के अलग–अलग हिस्सों में तनाव और वैश्विक व्यापार को लेकर अनिश्चितता जैसे मुद्दों को ध्यान में रखा गया था। 

बड़े संस्थानों का क्या अनुमान? 

कई वित्तीय संस्थानों और शोध रिपोर्टों ने अक्टूबर की बैठक में रेपो रेट बढ़ने की संभावना जताई है। एक रिपोर्ट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का अनुमान लगाया गया है। दरअसल, बैंक का मानना है कि अगर अक्टूबर में दर बढ़ती है तो वित्त वर्ष 2027 में आगे एक या दो और बढ़ोतरी हो सकती हैं। ऐसी स्थिति में रेपो रेट 5.75 से 6 प्रतिशत तक पहुंचने की संभावना भी बन सकती है। यह अनुमान आने वाले समय में RBI के रुख को लेकर है। इसे केंद्रीय बैंक का तय फैसला नहीं समझना चाहिए। 

महंगाई और बढ़ सकती है? 

एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक यानी CPI आधारित महंगाई 6 प्रतिशत से ऊपर जा सकती है और 6.5 प्रतिशत का स्तर भी पार कर सकती है। 

इस रिपोर्ट में अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी का सुझाव दिया गया है। इसके बाद अगर 2027 की शुरुआत में महंगाई 6 प्रतिशत से नीचे आती है तो आगे के फैसले पर विचार किया जा सकता है।यह एक शोध रिपोर्ट का अनुमान है, इसलिए इसे RBI की आधिकारिक योजना नहीं माना जाना चाहिए। 

आपकी EMI पर होगा कितना असर? 

देखा जाये तो, अगर RBI की इस मीटिंग के अगर रेपो रेट बढ़ता है तो कर्ज लेने वाले लोगों के लिए ब्याज का बोझ बढ़ सकता है। इसका असर खासतौर पर ऐसे होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन पर हो सकता है जिनकी ब्याज दर बाजार की दरों के साथ बदलती है। 

मसलन, अगर बैंक अपनी ब्याज दर बढ़ाते हैं तो कुछ ग्राहकों की EMI बढ़ सकती है या कर्ज चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है। हालांकि, हर बैंक का असर अलग हो सकता है और यह ग्राहक के कर्ज की शर्तों पर भी निर्भर करेगा।नई कार या घर खरीदने के लिए कर्ज लेने वालों के लिए भी ऊंची ब्याज दर का मतलब कुल भुगतान बढ़ना हो सकता है। 

FD वालों को मिल सकता है फायदा 

ब्याज दर बढ़ने का दूसरा पहलू बचत करने वालों के लिए अच्छा हो सकता है। अगर बैंक जमा पर ब्याज बढ़ाते हैं तो Fixed Deposit यानी FD पर भी आगे बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन सकती है।इसका फायदा खासतौर पर उन लोगों को हो सकता है जो अपनी बचत का एक हिस्सा FD में रखते हैं और नियमित ब्याज आय पर निर्भर हैं। हालांकि, FD की दर बढ़ाना या नहीं बढ़ाना पूरी तरह बैंक के फैसले पर निर्भर करता है। 

RBI के सामने कई सवाल 

गौरतलब है कि, MPC की बैठक में केवल कच्चे तेल और महंगाई पर ही चर्चा नहीं होगी। इसके साथ ही, आर्थिक विकास की रफ्तार, बाजार में पैसे की उपलब्धता और वैश्विक ब्याज दरों का रुख भी महत्वपूर्ण रहेगा। 

वहीं Ernst & Young के एक आकलन में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की हाल की 25 बेसिस पॉइंट की दर बढ़ोतरी, भारत की आर्थिक स्थिति, CPI और WPI महंगाई तथा M3 यानी अर्थव्यवस्था में उपलब्ध कुल धन की वृद्धि जैसे मुद्दों को महत्वपूर्ण माना गया है। 

इन सभी पहलुओं को देखने के बाद समिति यह तय करेगी कि इस समय ब्याज दर बढ़ाना जरूरी है या मौजूदा दर को कुछ और समय तक बनाए रखना बेहतर होगा। 

समझें एक नजर में पूरी स्थिति 

मुद्दा  मौजूदा स्थिति 
MPC बैठक  5 से 7 अक्टूबर 2026 
फैसले की तारीख  7 अक्टूबर 2026 
मौजूदा रेपो रेट  5.25% 
संभावित बढ़ोतरी  25 बेसिस पॉइंट 
बढ़ोतरी के बाद संभावित दर  5.50% 
मुख्य चिंता  महंगाई और कच्चे तेल की कीमत 
सीधा असर  कर्ज, EMI और जमा दरों पर 

शेयर बाजार भी देख रहा फैसला 

RBI का फैसला केवल बैंक ग्राहकों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। इसका असर शेयर बाजार और दूसरे वित्तीय बाजारों पर भी दिखाई दे सकता है। ऐसे में अगर RBI उम्मीद से ज्यादा सख्त रुख अपनाता है तो बाजार में थोड़ी सावधानी बढ़ सकती है। दूसरी तरफ अगर दरों में बदलाव नहीं होता या केंद्रीय बैंक आगे के लिए नरम संकेत देता है तो बाजार की प्रतिक्रिया अलग हो सकती है।इसलिए निवेशकों के लिए सिर्फ रेपो रेट का आंकड़ा देखना काफी नहीं होगा। RBI गवर्नर का बयान और आने वाले महीनों को लेकर दिए गए संकेत भी उतने ही महत्वपूर्ण रहेंगे। 

RBI का फैसला बताएगा आगे की दिशा 

देखा जाए तो इस समय RBI के सामने संतुलन बनाने की चुनौती है। जहां, एक तरफ महंगाई और महंगे कच्चे तेल का दबाव है, तो दूसरी तरफ आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार को बनाए रखना भी जरूरी है। 

अगर 7 अक्टूबर को रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किया जाता है तो यह 2023 के बाद पहली बढ़ोतरी होगी। इससे कर्ज की लागत पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि जमा पर बेहतर ब्याज मिलने की उम्मीद बन सकती है।वहीं अगर RBI इस दर को 5.25 प्रतिशत पर ही रखता है तो बाजार को यह संकेत मिल सकता है कि केंद्रीय बैंक फिलहाल इंतजार करना चाहता है। 

हालांकि, अब असली तस्वीर 7 अक्टूबर को साफ होगी। उस दिन सिर्फ ब्याज दर का फैसला ही नहीं, बल्कि RBI का आगे का रुख भी यह तय करने में अहम होगा कि, आने वाले महीनों में कर्ज, बचत और बाजार पर किस तरह का असर देखने को मिल सकता है। 

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