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आरबीआई के नए फॉरेक्स नियमों से बैंकिंग सेक्टर में हलचल; हेजिंग की लागत बढ़ने की आशंका

Authored By HDFC SKY | Published at: Oct 12, 2026 05:06 PM IST

आरबीआई के नए फॉरेक्स नियमों से बैंकिंग सेक्टर में हलचल; हेजिंग की लागत बढ़ने की आशंका

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नई दिल्ली, 12 अक्टूबर: भारतीय रिजर्व बैंक के नए विदेशी मुद्रा नियमों के बाद, बैंक अब फॉरेन एक्सचेंज डीलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (FEDAI) के जरिए इन नियमों के असर पर चर्चा कर रहे हैं। बैंकों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि नए नियमों की वजह से बढ़ने वाली अतिरिक्त लागत की भरपाई कैसे होगी और इसका कितना बोझ ग्राहकों पर डाला जाएगा।

10 अक्टूबर को घोषित किए गए इन नए नियमों में कई बड़े बदलाव किए गए हैं। इनमें बिना अंडरलाइंग एक्सपोजर के फॉरेक्स डेरिवेटिव लेनदेन की सीमा को 100 मिलियन डॉलर से घटाकर सीधे 5 मिलियन डॉलर कर दिया गया है। इसके अलावा, रद्द किए गए रुपया-लिंक्ड डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स की रीबुकिंग पर भी रोक लगा दी गई है। वहीं 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा के पात्र डेरिवेटिव सौदों के लिए 20 फीसदी कैश रिजर्व रखना अनिवार्य कर दिया गया है।

आरबीआई ने डॉक्यूमेंटेशन के नियमों को भी सख्त किया है ताकि कोई ग्राहक एक ही सौदे को अलग-अलग बैंकों के जरिए कवर ना कर सके। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने 12 अक्टूबर से तीन सरकारी तेल कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए एक स्पेशल विंडो खोली है। इससे वे डॉलर की खरीदारी इंटरबैंक बाजार के बजाय सीधे आरबीआई से कर सकेंगी।

हेजिंग महंगी होने की चिंताएं

हालांकि विदेशी मुद्रा जोखिम रिजर्व (FERR) से जुड़े नए नियम के कारण हेजिंग की लागत बढ़ना लगभग तय माना जा रहा है, क्योंकि बैंकों को अब डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट्स के एवज में आरबीआई के पास कैश रखना होगा। बाजार के जानकारों का मानना है कि इस अतिरिक्त फंडिंग की वजह से हेजिंग की लागत 1.3 से 1.5 प्रतिशत तक बढ़ सकती है। हालांकि, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि बैंक इस लागत का कितना हिस्सा खुद उठाते हैं और कितना ग्राहकों पर डालते हैं।

नए स्ट्रक्चर के मुताबिक अथॉराइज्ड डीलरों को 2 मिलियन डॉलर से ज्यादा के प्रत्येक डेरिवेटिव कॉन्ट्रैक्ट की रुपये में वैल्यू का 20 प्रतिशत हिस्सा कैश रिजर्व के तौर पर आरबीआई के पास रखना होगा। यह नियम उन सौदों पर लागू होगा जहां ग्राहक रुपये के बदले विदेशी मुद्रा खरीद रहें हैं।

हालांकि रिजर्व नियम का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि हेजिंग की कुल लागत 20 प्रतिशत बढ़ जाएगी। दरअसल बढ़ोतरी सिर्फ उस रिजर्व को फंड करने की लागत पर निर्भर करेगी। बैंक FEDAI के जरिए इन मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं और जल्द ही इंडस्ट्री की चिंताओं को आरबीआई के सामने रखा जा सकता है। तब तक बैंकों को मौजूदा दिशा-निर्देशों का ही पालन करना होगा।

डॉलर की मांग तय करेगी रुपये की चाल

जानकारों का मानना है कि फॉरवर्ड कवर महंगा होने से ऐसे कॉन्ट्रैक्ट्स की मांग घट सकती है। इसका नतीजा यह हो सकता है कि आयातक या तो कम अवधि की हेजिंग करें या फिर पेमेंट की तारीख के बिल्कुल करीब आने पर ही डॉलर खरीदें।

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