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भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया, जानिए आम जनता पर इसका क्या असर पड़ेगा?

Authored By HDFC SKY | Published at: Oct 7, 2026 02:31 PM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने रेपो रेट बढ़ाया, जानिए आम जनता पर इसका क्या असर पड़ेगा?

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मुंबई, अक्टूबर 7: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को रेपो रेट बढ़ाने का ऐलान किया है। भारतीय रिजर्व बैंक की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी ने (MPC) ने रेपो रेट में साढ़े तीन साल बाद 25 बेसिक प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की है। इस घोषणा के साथ ही भारत का रेपो रेट 5.25% से बढ़कर 5.50% हो गया है।

RBI की इस घोषणा से आम जनता के लिए क्या बदलेगा जानने से पहले आसान भाषा में समझिए कि रेपो रेट क्या होता है?

रेपो रेट क्या होता है? 

रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) देश के बैंकों को कम अवधि के लिए पैसा उधार देता है।

उदाहरण के लिए, मान लीजिए किसी बैंक को कुछ समय के लिए पैसों की ज़रूरत है। जरूरतमंद बैंक RBI से पैसा उधार लेता है और बदले में ब्याज देता है। जिस ब्याज दर पर बैंक भारतीय रिजर्व बैंक को पैसा देता है, उसे रेपो रेट कहते हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक रेपो रेट क्यों बढ़ाती है?

RBI अर्थव्यवस्था में बढ़ती महंगाई को नियंत्रित करने के लिए रेपो रेट बढ़ाती है। RBI महंगाई के अलावा आर्थिक विकास, घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों और वित्तीय स्थिरता जैसी कारणों से भी रेपो रेट को बढ़ाती है।

आसान शब्दों में कहें तो, जब RBI को लगता है कि महंगाई का दबाव ज्यादा है तो वह ब्याज दर बढ़ाकर क़र्ज़ और खर्च को धीमा करने की कोशिश करती है।

रेपो रेट बढ़ने-घटने पर क्या होता है? 

भारतीय रिजर्व बैंक अगर रेपो रेट बढ़ाता है तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो जाता है। इसका असर आगे चलकर कस्टमर के लोन पर भी पड़ता है। यानी होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन की ब्याज दर बढ़ सकती है, जिससे EMI बढ़ने की संभावना रहती है।

वहीं, अगर RBI रेपो रेट घटाता है तो बैंकों के लिए पैसा उधार लेना सस्ता होता है और इसका फायदा ग्राहकों को भी मिलता है। उन्हें कम ब्याज दर पर EMI मिल सकता है।

1.होम लोन महंगा- अगर बैंक अपने लोन ब्याज दर बढ़ाते हैं तो जिन लोगों ने लोन फ्लोटिंग ब्याज दर पर ली है, उनकी EMI बढ़ सकती है या फिर लोन की अवधि बढ़ जाएगी। बता दें कि फ्लोटिंग ब्याज दर का मतलब होता है कि ऐसा ब्याज दर जो समय के साथ बदल सकता है।

उदाहरण- मान लीजिए आपने 40 लाख का होम लोन लिया है तो ब्याज दर बढ़ने पर आपको हर महीने पहले की तुलना में ज़्यादा EMI देनी पड़ सकती है।

2.कार-बाइक लेना महंगा- बैंक लोन ब्याज दर बढ़ने के बाद कस्टमर को कार या बाइक खरीदने पर ज्यादा लागत चुकानी होगी।

3.बिजनेस के लिए लोन लेना महंगा- रेपो रेट बढ़ने के बंद नया बिजनेस शुरू करना, मशीनरी खरीदने, कारोबार बढ़ाना, वर्किंग कैपिटल के लिए पैसा लेना महंगा हो सकता है। कंपनियां और छोटे कारोबारी इन सारी चीजों के लिए बैंक से पैसा उधार लेते हैं। ऐसे में उनके लिए कर्ज लेना (Borrowing Cost) महंगा हो सकता है।

4.पर्सनल लोन महंगा हो सकता है- व्यक्तिगत जरूरतों के लिए मिलने वाला कर्ज़ महंगा होगा। पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर होम लोन की तुलना में ज़्यादा होती है, ऐसे में कुछ कस्टमर की जेब पर ये भारी पड़ सकता है।

अब अगर रेपो रेट बढ़ने के बाद कस्टमर के होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन की EMI का खर्च बढ़ेगा। ऐसे में उनकी आय का ज़्यादा हिस्सा EMI में जाएगा, जिससे उनके रोज़ाना के ख़र्चे पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

देश के प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर के कुछ बैंकों में होम लोन की शुरुआती ब्याज दरें

बैंक शुरुआती ब्याज दरें
बैंक ऑफ  इंडिया 7.10%
बैंक ऑफ महाराष्ट्र 7.10%
इंडियन ओवरसीज बैंक 7.10%
सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया 7.10%
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया 7.15%
यूको बैंक 7.15%
इंडियन बैंक 7.15%
केनरा बैंक 7.20%
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया 7.25%
ऐक्सिस बैंक 8.00%
आईसीआईसीआई बैंक 7.55%
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