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बॉण्ड बाजार में तरलता बढ़ाने पर सेबी का जोर, रीट-इनविट में विदेशी पूंजी की राह आसान

Authored By PTI | Published at: Sep 25, 2026 12:37 PM IST

बॉण्ड बाजार में तरलता बढ़ाने पर सेबी का जोर, रीट-इनविट में विदेशी पूंजी की राह आसान

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मुंबई, 25 सितंबर: बाजार नियामक सेबी ने द्वितीयक ऋण बाजार में तरलता बढ़ाने के लिए बाजार-निर्माण व्यवस्था और बॉण्ड सूचकांक में एक्सचेंज के जरिये कारोबार को विचाराधीन उपायों में शामिल बताया।

इसके साथ ही, सेबी के निदेशक मंडल ने रियल एस्टेट निवेश ट्रस्ट (रीट) और अवसंरचना निवेश ट्रस्ट (इनविट) के यूनिट के आधार पर डिपॉजिटरी रसीद (डीआर) जारी करने की व्यवस्था को मंजूरी दी।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को कहा कि कॉरपोरेट बॉण्ड बाजार में निवेशक आमतौर पर प्रतिभूतियों को परिपक्वता तक अपने पास रखते हैं। ऐसे में द्वितीयक बाजार में कारोबार बढ़ाने के लिए अधिक प्रतिभागियों को जोड़ना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि बाजार-निर्माण व्यवस्था सेबी के एजेंडा में है और बॉण्ड सूचकांकों में एक्सचेंज पर कारोबार की अनुमति देने के प्रस्ताव पर भी विचार किया जा रहा है।

पांडेय ने कहा कि खुदरा निवेशकों की भागीदारी बढ़ाने के लिए ऑनलाइन बॉण्ड मंच के जरिये बॉण्ड उपलब्ध कराए जा रहे हैं और न्यूनतम निवेश राशि घटाकर 10,000 रुपये कर दी गई है। उन्होंने कहा कि बॉण्ड बाजार को लेकर जागरूकता बढ़ाने की भी जरूरत है।

सेबी के निदेशक मंडल ने रीट और इनविट की यूनिट के आधार पर डिपॉजिटरी रसीद जारी करने के लिए संबंधित नियमों में संशोधन को मंजूरी दी। सेबी ने कहा कि इससे इन निवेश माध्यमों में डिपॉजिटरी रसीद के जरिये विदेशी पूंजी आकर्षित करने में मदद मिलेगी।

निदेशक मंडल ने रीट और इनविट से जुड़े मतदान नियमों में भी बदलाव किया। अब कुछ मामलों में 75 प्रतिशत की मंजूरी कुल बकाया यूनिट के बजाय मतदान में पड़े कुल मतों के आधार पर तय होगी। सेबी ने कहा कि इससे बिखरे स्वामित्व और कुछ यूनिटधारकों के मतदान में हिस्सा नहीं लेने से आने वाली दिक्कतें दूर होंगी।

सेबी ने ऋण प्रतिभूतियों को पहली बार सूचीबद्ध कराने वाली इकाइयों के लिए पहले से जारी सभी गैर-सूचीबद्ध गैर-परिवर्तनीय ऋण प्रतिभूतियों को अनिवार्य रूप से सूचीबद्ध कराने की व्यवस्था हटाने को भी मंजूरी दी। इसके तहत अब केवल भविष्य में जारी होने वाली ऐसी ऋण प्रतिभूतियों को सूचीबद्ध करना होगा। सेबी ने कहा कि इससे परिचालन संबंधी दिक्कतें और अनुपालन लागत कम होगी।

बोर्ड ने शोध विश्लेषकों और शोध संस्थाओं के लिए संस्थागत निवेशक ग्राहकों के साथ संचार की रिकॉर्डिंग बनाए रखने की अनिवार्यता में भी ढील देने को मंजूरी दी।

इसके अलावा, सेबी ने बुलियन से जुड़े साधनों के लिए वॉल्ट प्रबंधकों के नियामकीय ढांचे का विस्तार किया। वॉल्ट प्रबंधकों की न्यूनतम संपत्ति आवश्यकता 50 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपये कर दी गई है।

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