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UPI से भुगतान करने वालों के लिए बड़ी खबर! 15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR चार्ज टला

Authored By HDFC SKY | Updated at: Oct 13, 2026 02:54 PM IST

UPI से भुगतान करने वालों के लिए बड़ी खबर! 15 अक्टूबर से लागू होने वाला MDR चार्ज टला

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मुंबई, 13 अक्टूबर:  UPI  से भुगतान करने वाले व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। जानकारी दें कि, आगामी 15 अक्टूबर 2026 से लागू होने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को फिलहाल टाल दिया गया है।

इस जारी प्रस्ताव के तहत 2,000 रुपये से ज्यादा के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों पर 0.4 प्रतिशत तक शुल्क लगाने की तैयारी थी। अब इसे दिवाली के बाद लागू करने पर विचार किया जाएगा और नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। इससे त्योहारों के दौरान कारोबार करने वाले व्यापारियों को फिलहाल अतिरिक्त भुगतान लागत से राहत मिली है।

15 अक्टूबर से लागू नहीं होगा नया MDR चार्ज

इस बाबत, उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, UPI  और सर्विसेज स्टीयरिंग कमिटी ने आज मंगलवार, 13 अक्टूबर को त्योहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया। ऐसे में अब चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर MDR लागू करने की तारीख आगे बढ़ा दी गई है। पहले इसे आगामी 15 अक्टूबर से लागू करने की तैयारी थी।

वहीं, नई तारीख को लेकर अभी अंतिम घोषणा नहीं की गई है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि शुल्क किस दिन से शुरू होगा। ऐसे में व्यापारियों और भुगतान सेवा कंपनियों को आगे की आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना होगा।

क्या है MDR चार्ज और किससे लिया जाता है?

जानकारी दें कि, MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने और उसे प्रोसेस करने की व्यवस्था के तहत व्यापारी से लिया जा सकता है। यह ग्राहक द्वारा किए गए भुगतान और व्यापारी के खाते में आने वाली रकम के बीच लागत से जुड़ा हुआ होता है।

वहीं, UPI पर प्रस्तावित शुल्क सभी तरह के लेनदेन के लिए नहीं, बल्कि चुनिंदा पर्सन-टू-मर्चेंट यानी ग्राहक से व्यापारी को किए जाने वाले भुगतानों के लिए बताया गया है। इसका मतलब है कि, किसी दुकानदार, कारोबारी या सेवा प्रदाता को किए जाने वाले भुगतान पर नियम लागू होने की स्थिति में शुल्क लग सकता है। व्यक्ति से व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI  भुगतान को इस प्रस्ताव के समान नहीं मानना चाहिए।

जानें ₹10,000 के भुगतान पर कितना बनता है 0.4% शुल्क?

इस प्रस्तावित दर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से शुल्क की गणना इस तरह होगी। इस बाबत, नीचे दिए गए उदाहरण केवल गणित समझाने के लिए हैं। वास्तविक शुल्क लागू होने पर अंतिम नियमों और पात्र लेनदेन की शर्तों पर निर्भर करेगा।

भुगतान राशि 0.4% के हिसाब से शुल्क
₹2,000 ₹8
₹3,000 ₹12
₹5,000 ₹20
₹10,000 ₹40
₹20,000 ₹80

हालांकि, ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रस्ताव में 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी भुगतानों का जिक्र है। इसलिए हर UPI भुगतान पर यह दर लागू होने का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। शुल्क किस श्रेणी के लेनदेन पर लगेगा, इसकी अंतिम शर्तें महत्वपूर्ण होंगी।

कार्ड और UPI  भुगतान में क्या है अंतर?

जानकारी दें कि, कार्ड से भुगतान करने पर शुल्क और भुगतान प्रोसेसिंग की व्यवस्था पहले से ही मौजूद है। UPI का दायरा इससे काफी बड़ा है और छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े कारोबारियों तक इसका इस्तेमाल करते हैं। इसलिए UPIपर किसी भी नए शुल्क को लागू करने के लिए यह तय करना जरूरी होगा कि कौन-से लेनदेन इसके दायरे में आएंगे और व्यापारियों पर लागत का असर कितना होगा।

दिवाली से पहले व्यापारियों को क्यों मिली राहत?

दरअसल, त्योहारी सीजन में बाजारों में खरीदारी और भुगतान का कारोबार बढ़ जाता है। ऐसे समय में व्यापारियों की लागत बढ़ने से उनके मुनाफे पर भी असर पड़ सकता है। कारोबारी संगठनों और फिनटेक कंपनियों की ओर से भी इस प्रस्तावित शुल्क को लेकर चिंता जताए जाने की बात सामने आई थी।

इस बाबत, व्यापारियों को आशंका थी कि अतिरिक्त भुगतान लागत का कुछ हिस्सा ग्राहकों पर भी डाला जा सकता है। फिलहाल तारीख आगे बढ़ने से व्यापारियों को त्योहारी बिक्री के दौरान नई लागत की तत्काल चिंता नहीं करनी होगी। लेकिन शुल्क पूरी तरह रद्द होने की पुष्टि नहीं हुई है।

UPI पर शुल्क लगाने का फैसला अभी बाकी

जारी रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि, MDR लागू करने की समय सीमा को जनवरी 2027 तक आगे बढ़ाने के विकल्प पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इसे अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, शुल्क की नई तारीख अलग से घोषित होनी है।

वहीं, मामले पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमणकी ओर से भी इस मुद्दे पर संबंधित पक्षों के बीच बातचीत की बात कही गई थी। ऐसे में आगे का फैसला भुगतान व्यवस्था से जुड़े पक्षों और नियामकीय दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगा। फिलहाल ग्राहकों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि, प्रस्तावित MDR को आगामी 15 अक्टूबर से लागू करने की योजना अब टाल दी गई है।

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