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यूपीआई के 2,000 रुपये तक के भुगतान पर शुल्क नहीं, अधिक राशि पर एमडीआर तय होना बाकी

Authored By PTI | Published at: Sep 15, 2026 12:56 PM IST

यूपीआई के 2,000 रुपये तक के भुगतान पर शुल्क नहीं, अधिक राशि पर एमडीआर तय होना बाकी

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नयी दिल्ली, 15 सितंबर: सरकार ने बैंकों और भुगतान प्रणाली प्रदाताओं को 2,000 रुपये तक के यूपीआई लेनदेन या रुपे डेबिट कार्ड के जरिये किए गए भुगतान पर कोई शुल्क न लगाने का निर्देश दिया है।

सरकार ने हालांकि, यह स्पष्ट नहीं किया कि 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर शुल्क लागू होगा या नहीं और इसका भुगतान व्यापारियों को करना होगा या नहीं। अभी तक किसी भी राशि पर यूपीआई लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं लगता है।

सोमवार यानी 14 सितंबर की राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, कोई भी बैंक या प्रणाली प्रदाता रुपे डेबिट कार्ड या 2,000 रुपये तक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) लेनदेन के जरिये भुगतान करने या प्राप्त करने वाले व्यक्ति पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई शुल्क नहीं लगाएगा।

यह अधिसूचना भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा-10ए में संशोधन के बाद जारी की गई है। यह संशोधन यूपीआई और अन्य अधिसूचित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के जरिये किए गए भुगतान पर व्यापारियों से व्यापारी छूट दर (एमडीआर) लेने के लिए सक्षम ढांचा उपलब्ध कराता है।

संशोधन विधेयक को संसद के 13 अगस्त, 2026 को समाप्त मानसून सत्र के दौरान पारित किया गया था। विधेयक पारित होने के बाद सरकार ने कहा था कि भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) की अगुवाई वाली यूपीआई और सेवा संचालन समिति एमडीआर की दरों पर फैसला करेगी।

सरकार ने शुल्क लगाने के कारण बताते हुए बयान में कहा था कि लेनदेन की संख्या में तेजी से वृद्धि के साथ प्रणाली को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी रोकने और बुनियादी ढांचे में लगातार बड़े निवेश एवं उन्नयन की जरूरत है।

बयान में कहा गया था कि बाजार का विस्तार करने और प्रणाली को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शुल्क जरूरी हैं। अधिक कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित कर प्रतिस्पर्धा बढ़ाना जरूरी है और इसके लिए आत्मनिर्भर राजस्व मॉडल की जरूरत है।

सरकार ने कहा था कि विकास के अगले चरण के लिए केवल सब्सिडी पर निर्भर रहना व्यवहार्य नहीं है। यह सुनिश्चित करने के लिए भी संतुलित ढांचे की जरूरत है कि यूपीआई मजबूत, समावेशी और भविष्य की जरूरतों के लिए तैयार रहे।

यूपीआई का संचालन भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) करता है जो भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और भारतीय बैंक संघ की पहल है।

यह लोगों के बीच तत्काल भुगतान की सुविधा देता है और ग्राहकों को खरीदारी करते समय सीधे व्यापारियों को भुगतान करने की सुविधा भी देता है। विदेशों में इसकी मौजूदगी की बात करें तो यूपीआई अब 11 देशों में स्वीकार किया जाता है। हाल ही में उज्बेकिस्तान भी इस सूची में शामिल हुआ है।

अन्य देशों में सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, नेपाल, भूटान, कतर, श्रीलंका, कंबोडिया और यूनान शामिल हैं जहां यूपीआई स्वीकार किया जाता है।

गौरतलब है कि 25 अगस्त, 2016 को शुरू किए गए यूपीआई ने भारत के डिजिटल भुगतान परिदृश्य को बदल दिया है। इसका लेनदेन मूल्य वित्त वर्ष 2016-17 में 0.07 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 314 लाख करोड़ रुपये हो गया, यानी एक दशक में इसमें 4,000 गुना से अधिक की वृद्धि हुई है।

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