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कच्चे तेल में आई गिरावट से भारत को राहत, जानें Brent और WTI क्रूड के आज के भाव

Authored By HDFC SKY | Published at: Oct 6, 2026 12:02 PM IST

कच्चे तेल में आई गिरावट से भारत को राहत, जानें Brent और WTI क्रूड के आज के भाव

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मुंबई: आज मंगलवार 6 अक्टूबर 2026 को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी देखने को मिल रही है। जहां ब्रेंट क्रूड करीब 100.54 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा है, वहीं  WTI क्रूड करीब 89.33 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है। जानकारी दें कि, अक्टूबर की शुरुआत में ब्रेंट क्रूड 102.83 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, जिसके मुकाबले मौजूदा स्तर कम है। कच्चे तेल की कीमतों में यह बदलाव भारत के लिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में गिरावट से आयात लागत, महंगाई और तेल पर निर्भर कंपनियों की लागत पर कुछ राहत मिल सकती है। साथ ही, इसका असर भारतीय शेयर बाजार की धारणा पर भी देखने को मिल सकता है।

आज क्या है कच्चे तेल का भाव
आज मंगलवार, 6 अक्टूबर के आंकड़ों के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत करीब 100.54 डॉलर प्रति बैरल रही। वहीं 5 अक्टूबर को यह 100.29 डॉलर पर थी। यानी एक दिन में मामूली बढ़त दिखी, लेकिन महीने की शुरुआत से तुलना करें तो तस्वीर अलग है। बीते 1 अक्टूबर को ब्रेंट क्रूड 102.83 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर था। इसके बाद कीमत 5 अक्टूबर को 100.29 डॉलर तक आ गई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक अक्टूबर में अब तक यही सबसे कम स्तर रहा है।

तारीख कच्चे तेल की कीमत दैनिक बदलाव
1 अक्टूबर 2026 $102.83 +$4.80
2 अक्टूबर 2026 $102.47 -$0.36
3 अक्टूबर 2026 $102.72 +$0.25
5 अक्टूबर 2026 $100.29 -$2.43
6 अक्टूबर 2026 $100.54 +$0.25

इन 10 दिनों में कितना बदला भाव?
अब अगर पिछले करीब 10 दिनों के आंकड़ों को देखें तो कच्चे तेल की कीमत में काफी उतार-चढ़ाव रहा है। जहां बीते 24 सितंबर को ब्रेंट 107.01 डॉलर प्रति बैरल पर था। इसके बाद कीमत में लगातार कमजोरी आई और 26 सितंबर को यह 97.44 डॉलर तक पहुंच गया। हालांकि इसके बाद तेल ने फिर तेजी पकड़ी। जो 1 अक्टूबर को कीमत 102.83 डॉलर तक पहुंच गई। अब 6 अक्टूबर को यह करीब 100.54 डॉलर पर है। यानी हाल के उच्च स्तर से कीमत नीचे आई है, लेकिन अभी भी 100 डॉलर के आसपास बनी हुई है।

अक्टूबर में अब तक 2.23% की गिरावट
अब तक उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 1 अक्टूबर से 6 अक्टूबर के बीच कच्चे तेल की कीमत में कुल करीब 2.23% की गिरावट दर्ज हुई है। महीने का सबसे ऊंचा स्तर 1 अक्टूबर को 102.83 डॉलर रहा, जबकि 5 अक्टूबर को 100.29 डॉलर का सबसे निचला स्तर दर्ज किया गया। इससे साफ है कि तेल बाजार में अभी भी स्थिरता नहीं आई है। एक दिन में बड़ी गिरावट के बाद अगले दिन हल्की बढ़त भी देखने को मिल रही है।

पश्चिम एशिया पर बाजार की नजर
कच्चे तेल की कीमतों पर पश्चिम एशिया की स्थिति का सीधा असर पड़ रहा है। एक तरफ क्षेत्रीय तनाव कीमतों को ऊपर रखने का दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ कुछ प्रमुख देशों से तेल की आपूर्ति मजबूत रहने की खबरों ने बाजार में चिंता कम की है। जिसके चलते फिलहाल  निवेशक इस समय सिर्फ भू-राजनीतिक तनाव को नहीं देख रहे हैं, बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और मांग के आंकड़ों पर भी नजर रख रहे हैं। अगर आपूर्ति पर्याप्त बनी रहती है तो कीमतों पर ऊपर जाने का दबाव कुछ कम हो सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है कच्चा तेल?
दरअसल, भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल का आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश के आयात बिल पर दबाव बढ़ता है। इसका असर रुपये और महंगाई पर भी पड़ सकता है।इसके उलट तेल की कीमत में नरमी भारत के लिए राहत लेकर आ सकती है। इससे आयात लागत कम रखने में मदद मिल सकती है और पेट्रोलियम से जुड़ी कंपनियों की लागत पर भी दबाव घट सकता है। यही कारण है कि कच्चे तेल की कीमत में छोटे बदलाव पर भी भारतीय शेयर बाजार के निवेशकों की नजर रहती है।

शेयर बाजार को मिल सकती है राहत
तेल की कीमतों में नरमी को भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा सकता है। खासकर ऐसी कंपनियां जिनकी लागत में ईंधन या परिवहन का हिस्सा ज्यादा है, उनके लिए सस्ता कच्चा तेल राहत दे सकता है।गौरतलब है कि, सिर्फ तेल की कीमत देखकर Sensex या Nifty की दिशा तय नहीं होती। बल्कि वैश्विक बाजार, ब्याज दरें, रुपये की चाल, विदेशी निवेश और कंपनियों के तिमाही नतीजे भी बाजार को प्रभावित करते हैं।

निवेशकों किन बातों पर रखें नजर?
फिलहाल कच्चे तेल में अभी भी तेज उतार-चढ़ाव बना हुआ है। इसलिए निवेशकों को सिर्फ एक दिन की कीमत देखकर कोई बड़ा फैसला लेने से बचना चाहिए। तेल के साथ वैश्विक आर्थिक आंकड़ों और बाजार की दूसरी परिस्थितियों को भी देखना जरूरी है। हालांकि, किसी भी निवेश का फैसला केवल कच्चे तेल की कीमत या किसी एक बाजार संकेत के आधार पर नहीं होना चाहिए। कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार, मूल्यांकन और जोखिम को समझना भी उतना ही जरूरी है।

आगे 100 डॉलर का स्तर अहम
फिलहाल ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर के आसपास बना हुआ है। इसलिए आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कीमत इस स्तर से नीचे टिकती है या फिर पश्चिम एशिया से जुड़ी खबरों और आपूर्ति में किसी बदलाव के कारण दोबारा ऊपर जाती है।ऐसे में आज 6 अक्टूबर के आंकड़े बताते हैं कि महीने की शुरुआत के मुकाबले कच्चे तेल में नरमी आई है, लेकिन बाजार अभी पूरी तरह स्थिर नहीं हुआ है। भारत के लिए कीमतों में लगातार गिरावट फिलहाल राहत दे सकती है, जबकि दोबारा तेजी आने पर महंगाई और बाजार दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।

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