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रिलायंस जियो ने खुद को निवेशकों के समक्ष मूल्यांकन मोबाइल सेवा प्रदाता के बजाय प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में पेश किया

Authored By PTI | Published at: Oct 15, 2026 04:07 PM IST

रिलायंस जियो ने खुद को निवेशकों के समक्ष मूल्यांकन मोबाइल सेवा प्रदाता के बजाय प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में पेश किया

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मुंबई, 15 अक्टूबर: जियो प्लेटफॉर्म्स ने निवेशकों से उसका मूल्यांकन मोबाइल सेवा प्रदाता के बजाय प्रौद्योगिकी कंपनी के रूप में करने को कहा है। कंपनी का कहना है कि वह विदेशों में दूरसंचार कंपनियों को अपना नेटवर्क सॉफ्टवेयर और उपकरण बेचेगी, हालांकि उसका कारोबार अब भी मुख्य रूप से घरेलू बाजार तक सीमित है। कंपनी के सूचीबद्ध होने को लेकर जमा दस्तावेजों से यह जानकारी मिली।

रिलायंस इंडस्ट्रीज की दूरसंचार और डिजिटल सेवा इकाई जियो प्लेटफॉर्म्स का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) 21 अक्टूबर को आएगा। कंपनी की सेबी के पास जमा विवरण पुस्तिका (रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) के अनुसार, यह भारत की ग्राहकों की संख्या के लिहाज से सबसे बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी का निर्गम होगा।

इस निर्गम के तहत 10 रुपये अंकित मूल्य वाले अधिकतम 27 करोड़ नए शेयर जारी किए जाएंगे। इसमें मौजूदा शेयरधारकों की ओर से शेयर बेचने का कोई प्रस्ताव नहीं है। यह कंपनी की मौजूदा कुल शेयर पूंजी का करीब तीन प्रतिशत है।

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कंपनी के निर्गम के लिए मूल्य दायरा प्रति शेयर 1,065 से 1,119 रुपये रखा गया है। मूल्य दायरे के ऊपरी स्तर पर करीब 30,213 करोड़ रुपये जुटाए जा सकते हैं। इस तरह यह भारत का अबतक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

आईपीओ शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंद होगा। वहीं, बड़े संस्थागत निवेशकों के लिए बोली प्रक्रिया सोमवार, 19 अक्टूबर को होगी।

कंपनी ने विवरण पुस्तिका में कहा कि उसने अपने नेटवर्क और सेवाओं की पूरी प्रणाली मुख्य रूप से अपनी तकनीक के आधार पर तैयार और विकसित की है। इसमें रेडियो नेटवर्क से लेकर मुख्य नेटवर्क प्रणाली और परिचालन सॉफ्टवेयर शामिल हैं।

परामर्श कंपनी एनालिसिस मेसन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जियो ने खुद को दुनिया की एकमात्र ऐसी संपर्क सेवा प्रदाता कंपनी बताया है, जिसका पूरी तरह से अपना स्वतंत्र 5जी प्रौद्योगिकी ढांचा राष्ट्रीय स्तर पर तैनात है।

कंपनी ने विदेशों में विस्तार को अपनी वृद्धि की रणनीति का हिस्सा बताया है। उसके मुताबिक, क्लाउड आधारित रेडियो नेटवर्क, 5जी कोर नेटवर्क, बिलिंग और परिचालन सॉफ्टवेयर, फिक्स्ड वायरलेस उत्पादों तथा कृत्रिम मेधा आधारित नेटवर्क स्वचालन तकनीक का उपयोग अन्य दूरसंचार कंपनियां अपने नेटवर्क को अत्याधुनिक बनाने और ब्रॉडबैंड सेवाओं के विस्तार के लिए कर सकती हैं। हालांकि, दस्तावेज में इन उत्पादों की बिक्री से होने वाली आय के आंकड़े नहीं दिए गए हैं।

बीते वित्त वर्ष में कंपनी के परिचालन राजस्व में भारत की हिस्सेदारी 96.62 प्रतिशत थी। यानी विदेशों से प्राप्त राजस्व की हिस्सेदारी करीब 3.4 प्रतिशत रही। समूह की लाइसेंस प्राप्त दूरसंचार इकाई रिलायंस जियो इन्फोकॉम ने कुल राजस्व में 87.74 प्रतिशत का योगदान दिया।

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जून के अंत में जियो प्लेटफॉर्म्स के 12,477 कर्मचारी डिजिटल उत्पादों और प्रौद्योगिकी विकास से जुड़े कार्यों में लगे थे। यह कंपनी के पूर्णकालिक कर्मचारियों का करीब 45 प्रतिशत है। कंपनी ने 7,220 पेटेंट आवेदन दाखिल किए हैं, जिनमें 2,655 भारत में और 4,565 विदेशों में दाखिल किए गए हैं। कंपनी ने कहा कि विश्व बौद्धिक संपदा संगठन की 2025 की पेटेंट आवेदन सूची के शीर्ष 20 में शामिल होने वाली वह एकमात्र भारतीय कंपनी थी।

वीडियो प्रसारण, क्लाउड और उद्यम सेवाओं जैसे डिजिटल सेवा कारोबार संभालने वाली मूल कंपनी जियो प्लेटफॉर्म्स की वृद्धि उसकी दूरसंचार इकाई से तेज है। वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी का एकल आधार पर राजस्व बढ़कर 16,170 करोड़ रुपये हो गया, जो दो साल पहले 7,570 करोड़ रुपये था। समूह के कुल राजस्व में इसकी हिस्सेदारी भी बढ़कर 11 प्रतिशत हो गई, जो पहले 6.9 प्रतिशत थी।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के पास जियो प्लेटफॉर्म्स की 66.43 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

Disclaimer: यह लेख PTI की ऑटो-पब्लिश्ड फीड से लिया गया है। इसमें HDFC Sky की टीम द्वारा कोई संपादन या बदलाव नहीं किया गया है।   

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